Modi Cabinet Approves Census 2027 | ₹11,718 Crore Budget for Digital Census
December 13, 2025
जनगणना 2027 के लिए Modi Cabinet की मंज़ूरी, 11,718 करोड़ रुपये का बड़ा बजट जारी
केंद्र सरकार ने आने वाली जनगणना 2027 के लिए बड़ा फैसला लिया है। मोदी कैबिनेट ने इस राष्ट्रीय प्रक्रिया को पूरा करने के लिए करीब 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंज़ूर कर दिया है। यह रकम देशभर में जनगणना से जुड़ी तैयारी, तकनीकी बदलाव, कर्मचारी प्रशिक्षण और डेटा संग्रह जैसे कामों पर खर्च की जाएगी। भारत में जनगणना को सबसे बड़ी जानकारी जुटाने वाली प्रक्रिया माना जाता है, क्योंकि इससे देश की आबादी, शिक्षा, रोज़गार, घरों की स्थिति और कई सामाजिक पहलुओं की असली तस्वीर सामने आती है। यही वजह है कि सरकार इस बार इसे और सुरक्षित, तेज और आधुनिक तरीके से करना चाहती है।
इतनी बड़ी रकम की जरूरत क्यों पड़ी
जनगणना जैसा काम बहुत बड़ा और समय लेने वाला होता है। इसमें लाखों कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करते हैं। इसके लिए फॉर्म, डिजिटल उपकरण, सर्वर, सुरक्षा सिस्टम और प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है। सरकार इस बार डिजिटल तरीके के साथ जनगणना को और आधुनिक बना रही है, ताकि जानकारी तेज़ी से इकट्ठी हो सके और गलतियाँ कम हों। 11,718 करोड़ रुपये की रकम में वही सभी खर्च शामिल हैं जैसे तकनीकी तैयारी, मैदान में काम करने वाले अफसरों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग, राज्यों को मिलने वाली मदद और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रखने का बजट।
2027 में जनगणना की प्रक्रिया कैसी होगी
इस बार जनगणना पारंपरिक और डिजिटल दोनों तरीके से की जाएगी। मतलब, कई जगह कर्मचारी मोबाइल टैब या डिजिटल उपकरण से डेटा भरेंगे, ताकि जानकारी सीधे सुरक्षित सिस्टम में चली जाए। इससे गिनती जल्दी खत्म होगी और डेटा तुरंत उपलब्ध हो सकेगा। लोगों को भी पहले की तरह घर पर विवरण देना होगा, लेकिन डिजिटलीकरण होने से कागज़ पर होने वाली गलती और देरी काफी कम हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इस आधुनिक प्रक्रिया से देश की असली स्थिति जल्दी सामने आ पाएगी और नीति बनाने में आसानी होगी।देश के लिए जनगणना क्यों जरूरी है
जनगणना सिर्फ संख्या बताने वाली प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी जानकारी होती है। इससे सरकार को पता चलता है कि कितने लोग नौकरी कर रहे हैं, कितने बच्चे स्कूल जाते हैं, कितने घर पक्के हैं, कितनी सुविधाएँ कहाँ पहुंची हैं और कहाँ अभी बड़ा अंतर है। इन आंकड़ों से योजनाएँ बनाई जाती हैंmजैसे राशन, बिजली, पानी, सड़कें, स्कूल और अस्पताल जैसी ज़रूरतों के लिए किस क्षेत्र को कितना बजट देना है। अगर जनगणना न हो, तो सरकार न सही जानकारी जुटा पाएगी और न सही योजना बना पाएगी।
डिजिटल जनगणना के फायदे
पहले जनगणना में कागज़ का काम बहुत होता था, जिससे समय भी ज्यादा लगता था और गलती की संभावना भी रहती थी। डिजिटल जनगणना से यह परेशानी काफी कम हो जाएगी। डेटा एक बार दर्ज होते ही सुरक्षित सिस्टम में चला जाएगा और तुरंत जाँच भी हो सकेगी। इससे रिपोर्ट जल्दी तैयार होगी और देश को सही जानकारी समय पर मिल जाएगी। यह तरीका सुरक्षित भी माना जाता है, क्योंकि डेटा को डिजिटल सुरक्षा में रखा जाएगा और किसी तीसरे व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल होगा।कैसे बदलेगी सरकारी योजनाओं की तैयारी
नई जनगणना आने के बाद कई योजनाएँ नए तरीके से बनाई जाएंगी। आबादी बढ़ने या कम होने, नई बस्तियों के बनने, बेरोज़गारी की स्थिति और शिक्षा के स्तर की जानकारी से सरकार तय करेगी कि किस क्षेत्र में क्या सुधार करना है। यह जानकारी राज्यों और जिलों को भी मिलेगी, ताकि स्थानीय स्तर पर काम आसान हो सके। मतलब, जनगणना के नए आंकड़े आने से पूरे देश में योजनाएँ और फंड वितरण एकदम सही दिशा में हो पाएगा।
जनगणना से देश की असली ज़रूरतें कैसे तय होंगी
जनगणना 2027 से सरकार को यह साफ समझ आएगा कि देश के किस हिस्से में कौन सी सुविधा की सबसे ज्यादा जरूरत है। कई जगहों पर आबादी बढ़ रही है, तो कहीं कम हो रही है, कुछ इलाकों में घर पक्के बन रहे हैं जबकि कुछ जगह आज भी मूलभूत सुविधाएँ नहीं पहुंची हैं। जब सरकार के पास सही आंकड़े होंगे तभी सड़कें, अस्पताल, स्कूल, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं के लिए सही जगह बजट दिया जा सकेगा। जनगणना के आंकड़े यह भी बताएंगे कि किस जिले में रोजगार कम है, किस शहर में भीड़ बढ़ रही है और कहाँ नए विकास कार्य की जरूरत है। इस तरह यह प्रक्रिया देश की असली जरूरतों को पहचानकर बेहतर योजना बनाने का आधार बनेगी।दूसरी सरकारी योजनाओं पर भी पड़ेगा असर
जनगणना का डेटा सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं होता, बल्कि आने वाली कई सरकारी योजनाओं की नींव बनाता है। चाहे वह राशन कार्ड हो, गैस योजना हो, आवास योजना हो या फिर बुजुर्गों और बच्चों के लिए दी जाने वाली सहायता सभी योजनाओं की दिशा जनगणना के आंकड़े तय करते हैं। अगर किसी इलाके में गरीबी ज्यादा पाई जाती है तो वहां की योजनाओं को और मजबूत किया जाता है। अगर किसी शहर में नौकरी की मांग ज्यादा है तो वहां उद्योग और प्रशिक्षण केंद्र बढ़ाए जा सकते हैं। इस तरह जनगणना 2027 सीधे तरीके से करोड़ों लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करेगी।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का अंतर फिर से तय होगा
देश में लगातार बदलाव हो रहा है और कई गांव अब कस्बों का रूप ले रहे हैं, जबकि कुछ शहर तेजी से फैलते जा रहे हैं। जनगणना 2027 में इन बदलावों का सही रिकॉर्ड बनेगा, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का वास्तविक अंतर सामने आएगा। इससे सरकार समझ सकेगी कि किस इलाके को शहर का दर्जा देना चाहिए, कहाँ नई सुविधाएँ बढ़ानी हैं और कहाँ जनसंख्या दबाव कम करने के लिए योजना बनानी पड़ेगी। यह जानकारी आगे चलकर नए जिलों, नई नगरपालिकाओं और नई योजनाओं की दिशा तय करेगी। शहरीकरण से जुड़े मुद्दों को समझने में भी यह जनगणना महत्वपूर्ण साबित होगी।महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी नई जानकारी
जनगणना समाज के हर वर्ग की स्थिति बताती है। इससे पता चलेगा कि महिलाओं की शिक्षा, कार्यभागीदारी और सुरक्षा से जुड़ी स्थिति कैसी है। बच्चों की संख्या, उनकी पढ़ाई और पोषण की स्थिति से सरकार तय करेगी कि कहाँ नए स्कूल और पोषण कार्यक्रम की जरूरत है। बुजुर्गों की संख्या और उनकी स्थितियों को समझकर उनके लिए स्वास्थ्य सुविधा और सहायता योजनाओं की दिशा बनाई जाएगी। इस बार डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से इन वर्गों के आंकड़े और भी साफ और तेज़ तरीके से सामने आएँगे।