FCRA 2026 Bill: हम सरकार के इस कदम का समर्थन क्यों करते हैं

FCRA 2026 Bill: हम सरकार के इस कदम का समर्थन क्यों करते हैं

October 12, 2026

FCRA 2026 Bill: हम सरकार के इस कदम का समर्थन क्यों करते हैं

भारत जैसे विशाल और लोकतांत्रिक देश में सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और गैर-सरकारी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। अनेक संस्थाएं समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए अच्छा काम करती हैं और इनमें से कई संस्थाओं को विदेशों से आर्थिक सहायता भी प्राप्त होती है। लेकिन जब बात विदेशी धन की आती है, तो पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।

इसी दिशा में केंद्र सरकार ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 — FCRA Amendment Bill 2026 पेश किया है। यह बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और वर्तमान में संसदीय समिति के विचाराधीन है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनाना है।

हम सरकार के इस कदम का समर्थन क्यों करते हैं?

मेरे विचार से विदेश से आने वाला पैसा यदि भारत में सामाजिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो उसकी पूरी जानकारी और स्पष्ट जवाबदेही होनी चाहिए।

FCRA 2026 Bill में ऐसी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है जिसमें किसी संस्था का FCRA Certificate रद्द होने, surrender होने, renewal न होने या renewal आवेदन अस्वीकार होने की स्थिति में उसके बचे हुए विदेशी योगदान और उससे संबंधित संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक Designated Authority की व्यवस्था होगी।

इससे विदेशी धन या उससे खरीदी गई संपत्तियों के भविष्य को लेकर कानूनी स्पष्टता बढ़ सकती है।

मेरे अनुसार यह जरूरी है कि:

  • विदेश से मिलने वाले हर बड़े योगदान का उचित रिकॉर्ड हो।

  • पैसा उसी उद्देश्य के लिए खर्च हो जिसके लिए उसे स्वीकार किया गया है।

  • संस्थाएं अपने काम और वित्तीय गतिविधियों के प्रति जवाबदेह रहें।

  • विदेशी धन का इस्तेमाल भारत के राष्ट्रीय हित के विरुद्ध न हो।

  • ईमानदारी से सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं के लिए स्पष्ट नियम उपलब्ध हों।

FCRA का मूल उद्देश्य भी विदेशी योगदान को इस प्रकार विनियमित करना है कि उसका उपयोग देश के राष्ट्रीय हित के विरुद्ध गतिविधियों में न हो।

सख्त नियम के साथ निष्पक्ष व्यवस्था भी जरूरी

सरकार का समर्थन करने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक NGO या विदेशी सहायता प्राप्त करने वाली संस्था को संदेह की नजर से देखा जाए। भारत में हजारों संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम कर रही हैं।

इसलिए कानून ऐसा होना चाहिए जो गलत इस्तेमाल को रोके लेकिन सही काम करने वाली संस्थाओं के लिए अनावश्यक बाधाएं पैदा न करे।

FCRA 2026 Bill में कुछ दंडों को rationalise करने का प्रस्ताव भी है। उदाहरण के लिए कुछ उल्लंघनों में अधिकतम कारावास की अवधि पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है।

निष्कर्ष

मेरा मानना है कि राष्ट्रीय हित, पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी विदेशी फंडिंग व्यवस्था की नींव होनी चाहिए।

यदि कोई संस्था विदेश से पैसा लेकर भारत में काम करती है, तो सरकार को यह जानने और सुनिश्चित करने का अधिकार होना चाहिए कि पैसा कहां से आया और उसका इस्तेमाल कहां हुआ।

इसी दृष्टिकोण से मैं FCRA Amendment Bill 2026 के पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाले उद्देश्य का समर्थन करता हूं।

एक मजबूत भारत के लिए सामाजिक सेवा भी जरूरी है और उस सेवा में पारदर्शिता भी।

— Sanjay Lathiya
SanjayLathiya.com

fcra-2026-bill--0
fcra-2026-bill--1

Leave a Comment on this Blog